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कैसी है ये श्रधा जंहा सालों से नहीं बने गांव में पक्के घर, जानिए इसकी वजह

 

राजस्थान के अजमेर जिले में स्थित देवमाली गांव है जिसकी स्टोरी बड़ी ही दिलचस्प है। इस गांव के लोगो के पास पैसों की कोई कमी नहीं है सब धनवान है  फिर भी ना जाने क्यों यहाँ के लोग मिट्टी के मकानों में रहते है और आज भी ये लोग अपने मकान पक्के नहीं बनाते हैं। यहां लोगो के घरों में आज भी मिट्टी के चूल्हे जलते है। इन सबके पीछे गांव वालों की एक मान्यता है। यहीं नहीं यहां के लोग शादी में दूल्हे को घोड़ी पर नहीं बिठाते हैं।



देवमाली गांव का कोई भी लड़का अपनी शादी में घोड़ी पर नहीं बैठता है। गांव के लोगो का मानना है कि अगर दूल्हा घोड़ी पर बैठता है तो इससे शादी के बाद कई हादसे हो जाते हैं। गांव वालों का मानना है कि गांव में पक्के मकान बनते ही गांव में कोई न कोई विपत्ति आ जाती है। हम आपको बता दें कि इस गांव के लोग अपने आप को एक ही पूर्वज के संतान मानते हैं। उनका यह कहना है कि उनके पूर्वज ने ही देवमाली गांव को बसाया था। गांव के कई लोगों ने पक्के घर बनवाएं थे लेकिन कुछ ही दिनों बाद में पूरा का पूरा मकान ढह गया। देवमाली गांव के लोग इसे एक मान्यता मानते हैं जबकि, आस-पास के गांव वाले इसे अंधविश्वास मानते हैं।

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गांव में मांस – मदिरा का सेवन नहीं होता है-

देवमाली गांव की एक खासियत यह भी है की यहां का कोई भी व्यक्ति मांस नहीं खाता है पूरा गांव शाकाहारी है। इस गांव में 80 परिवार रहते है लेकिन कोई भी शराब नहीं पीता है। यहां श्री देवनारायण भगवान का मंदिर भी है, वहां के लोग इन्हें विष्णु का अवतार मानते हैं और इस गांव की सारी जमीन भी भगवान देवनारायण के नाम पर ही है। गांव के किसी भी व्यक्ति के नाम पर यहां थोड़ी सी भी जमीन नहीं है।


गांव के किसी भी मकान में ताला नहीं लगता है-

देवमाली गांव में किसी भी घर में ताला नहीं लगता है। पिछले 50 सालों में इस गांव में किसी प्रकार की कोई चोरी नहीं हुई है और ना ही पुलिस थाने में कोई चोरी का मामला दर्ज़ है। गांव वालो के बीच किसी तरह का कोई विवाद भी नहीं हुआ है।

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हमारे भारत देश में अभी भी कही कही ऐसी मान्यता देखने को मिल जाएगी| लोग भले ही इसे अंधविश्वास का नाम दे पर जो ये परम्परा निभा रहे है उनके लिए उनकी श्रधा ही सब कुछ है उन्हें किसी से कोई फर्क नही पड़ता की कोन उनके बारे में क्या सोचता है|

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