आखिर दीपो के त्यौहार में क्यूँ होती है ये अंधविश्वासी प्रथा|

 

दीपावली एक ऐसा त्यौहार जो हमारे लिए बहुत मायेने रखता है हर परिवार के सदस्य खासकर बच्चो को इस त्यौहार का बेसब्री से इंतजार रहता है और हो भी क्यूँ ना नए कपडे,मिठाईयां और पटाखे जो मिलेंगे| हर तरफ रौशनी हर तरफ चहलपहल बड़ा मजा आता है इस त्यौहार में| आप सभी जानते है इसके पीछे की कहानी के किस तरह भगवान  राम, रावण को मर के विजय हुए और उनके घर वापसी पर सबने उनका इस तरह ही स्वागत किया| पर आप जानते इस त्यौहार पर कुछ लोग किसी का बुरा भी करते है टोन टोटके करते है| यंहा तक बलि भी  दी जाती है अपने फायेदे के लिए इस दिन | ऐसी ही एक बलि प्रथा के बारे में आज आपको जानकारी देते है|


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कुछ लोगो का मानना है कि उल्लू, लक्ष्मी माता का प्रतीक होता है क्यूंकि वो उनका वाहन है और धनतेरस या दीवाली वाले दिन इसकी बलि देने से लक्ष्मी माता प्रसन्न होती है।ये लोग इस अंधविश्वास के चलते ये काम करते है और उल्लू की बलि देकर अधिक लक्ष्मी माता को प्रसन्न करते है जो कि सिर्फ अंधविश्वास है।

आपको जानकर हैरानी होगी कि अंधविश्वासी लोग दीवाली से लगभग 45 दिन पहले ही उल्लू खरीद लेते है और उसको पूजा के लिए तैयार करने के लिए रोज शराब पिलाई जाती है। दीपावली वाले दिन इसकी बलि देकर इसके कान, आंख और पंखों की भी पूजा करते है।

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अगर आप किसी भी पक्षी को बाजार से खरीदते है तो सामान्यता वो आपको 400 से 500 तक मिल जाता है ऐसे ही उल्लू भी मिलता है।
दीपावली के समय उल्लू की तस्करी तक की जाती है क्योंकि इस समय उल्लू की शुरुआती कीमत लगभग 10000 रुपए होती है।

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अगर आप नहीं जानते है तो जान लें कि उल्लू को मारना या बलि देना दोनो गैरकानूनी है।भारतीय कानून के अंतर्गत जो ऐसा करते पकड़ा गया उसको जेल तक हो सकती है। उल्लू की तस्करी करने की सजा 3 साल की तय की गई है।



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अंत में हम इतना ही कहेंगे समय से पहले और किस्मत से जायदा किसी को कुछ नही मिलता| तो आप लोग कृपा करके इन सब से दूर रहिये और अपनी दिवाली धूमधाम से मानिए| किसी का कोई नुकसान मत कीजिये|उम्मीद है आपको आज का पोस्ट पसंद आएगा|

 

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