यात्रीगण कृपया ध्यान दे| आखिर मिल ही गई इस आवाज़ को अपनी पहचान|

 

दोस्तों ट्रेन में हम सभी ने सफ़र किया है| मैंने तो अभी हाल ही में किया मुंबई से हरिद्वार | आप सभी ने  एक आवाज़ सुनी होगी जो की हर स्टेशन पर सुनने को मिलती है चाहे आप भारत के किसी भी कोने में चले जाये| और वो आवाज़ है यात्रीगण कृपया ध्यान दे गाड़ी संख्या इतना  प्लेटफार्म नंबर इतने पर आएगी| आपको क्या लगता है वो आवाज़ किसी कंप्यूटर की है या किसी इन्सान की| तो  चलिए आज आपको उसी जानी पहचानी आवाज़ के बारे में बताते है|

दो दशक से भी ज्यादा बीते चुके हैं, फिर भी रेलवे के अनाउंसमेंट की ये आवाज आज भी उसी ताजगी से आपको ट्रेन से जुड़ी जानकारी देती है। लेकिन क्या आपने कभी गौर किया है कि आखिर ये आवाज किसकी है|

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इस आवाज की पीछे का नाम है सरला चौधरी। भले ही आज वे रेलवे में अनाउंसर के पद पर नहीं हैं| लेकिन उनकी आवाज आज भी काम कर रही है। सरला ने 1982 में रेलवे में अनाउंसर के तौर पर दिहाड़ी पर काम करना शुरू किया था।

 

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1986 में ये पद स्थाई कर दिया गया था। उस समय सरला चौधरी को काफी मेहनत करनी पड़ती थी। उस दौर में कंप्यूटर न होने की वजह से उन्हें हर स्टेशन पर पहुंचकर घोषणा करनी पड़ती थी। ऐसे में एक एनाउंसमेंट रिकॉर्ड करने में उन्हें तीन से चार दिन लग जाते थे। कई अलग-अलग भाषाओं में भी ये रिकॉर्ड करने पड़ते थे। बाद में रेलवे में कई बदलाव हुए और ये अनाउंसमेंट की जिम्मेदारी ट्रेन मैनेजमेंट सिस्टम को दे दी गई।

 

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एक वेबसाइट के मुताबिक, सरला चौधरी ने करीब 17 साल पहले रेलवे की जॉब छोड़ दी थी और ओएचई विभाग में कार्यालय अधीक्षक की जॉब ले ली। ऐसे में उनकी आवाज को स्टैंडबाय के लिए सेव कर लिया गया है। इसलिए आज भी जब स्टेशन पर होते हैं तो आपको यही आवाज सुनने को मिलती है।

 

तो ये थी जानकारी एक ऐसी आवाज़ के बारे में जिसे आप बचपन से सुनते आ रहे थे पर अब आप कह  सकते है अपने दोस्तों को की आप जानते है किसकी है ये आवाज़|

 

 

 

 

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